मध्य प्रदेश में बिजली व्यवस्था होगी और मजबूत! HT लाइनों में C-वेज कनेक्टर का पायलट प्रोजेक्ट शुरू

ग्वालियर
 प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए अब एचटी (हाईटेंशन) लाइनों के कनेक्शनों में आधुनिक तकनीक अपनाने की तैयारी है। विद्युत वितरण कंपनियां कंडक्टर जंपर और अन्य कनेक्शनों में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक बाइंडिंग पद्धति के स्थान पर सी-वेज कनेक्टर के उपयोग की संभावनाओं का परीक्षण करेंगी। महाराष्ट्र में इस तकनीक के बेहतर परिणाम सामने आने के बाद प्रदेश में भी इसे वितरण नेटवर्क में लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक एचटी लाइन में कनेक्शन कमजोर होने पर ढीला संपर्क, स्पार्किंग, हॉट स्पॉट और जंपर फेल होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। कई बार यही छोटी तकनीकी खराबी लाइन फॉल्ट और लंबे समय तक बिजली गुल होने का कारण बन जाती है। सी-वेज कनेक्टर का उद्देश्य कनेक्शन को मजबूत और स्थायी बनाकर इन समस्याओं की संभावना को कम करना है।

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ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले चयनित क्षेत्रों में सी-वेज कनेक्टर लगा कर इनके प्रदर्शन का परीक्षण किया जाएगा। इसमें कनेक्शन की मजबूती, फाल्ट की स्थिति, स्पार्किंग और जंपर फेल होने की घटनाओं जैसे तकनीकी पहलुओं की निगरानी की जाएगी। परिणाम सकारात्मक रहे तो वितरण कंपनियां इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य क्षेत्रों में भी लागू कर सकती हैं।

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ब्रेकडाउन घटाने पर रहेगा जोर
वितरण नेटवर्क में इस तकनीक के इस्तेमाल का सबसे बड़ा लक्ष्य अनियोजित बिजली व्यवधान और ब्रेकडाउन को कम करना है। मजबूत कनेक्शन होने से लाइन की विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है, जिसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा। खासकर उन क्षेत्रों में जहां एचटी लाइनों में बार-बार जंपर या कनेक्शन संबंधी खराबी के कारण फाल्ट होते हैं, वहां यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।

एमपी ट्रांसको में पहले से आधुनिक कनेक्टिविटी
मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) अपने एक्स्ट्रा हाईटेंशन नेटवर्क में आधुनिक कनेक्टिविटी तकनीकों का उपयोग कर रही है। अब इसी तरह के तकनीकी सुधार वितरण नेटवर्क में किए जाने की तैयारी है। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो आने वाले समय में पारंपरिक कनेक्शन पद्धति की जगह आधुनिक कनेक्टरों का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है।

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    वैसे एमपी ट्रांसको पहले से ही आधुनिक कनेक्टिविटी तकनीकों का उपयोग कर रही है। ट्रांसमिशन लाइनों में भी सी-वेज कनेक्टर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यदि सभी विद्युत वितरण कंपनियां इस तकनीक को अपनाती हैं, तो इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी और इसका सीधा लाभ आमजन को मिलेगा। – शशिकांत ओझा, जनसंपर्क अधिकारी, एमपी ट्रांसको।

 

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